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इतिहास का काला पन्ना पलटती है 7 एपिसोड वाली धमाकेदार क्राइम थ्रिलर सीरीज, सस्पेंस से भरी है प्रधानमंत्री की मौत की गुत्थी, IMDb पर भी तगड़ी रेटिंग

 Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
 Published : Apr 07, 2026 10:41 am IST,  Updated : Apr 07, 2026 10:41 am IST

साल 1991 में एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इसी घटना की सच्चाई एक सात एपिसोड की वेब सीरीज में दिखाने की कोशिश की गई है। इस क्राइम थ्रिलर सीरीज को शानदार IMDb रेटिंग मिली है।

The Hunt The Rajiv Gandhi Assassination Case - India TV Hindi
शो से लिया गया एक शॉट। Image Source : SONYLIV

भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने देश की दिशा और दशा हमेशा के लिए बदल दी। 1991 में मई महीने का एक दिन था, जिसने न केवल एक उभरते नेता को छीन लिया बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए। सोनी लिव पर प्रसारित वेब सीरीज 'द हंट: द राजीव गांधी एसेसिनेशन' उसी काले अध्याय के बाद शुरू हुए उस अभियान की कहानी है, जिसने हत्यारों को पाताल से भी ढूंढ निकालने का बीड़ा उठाया था। नागेश कुकुनूर के निर्देशन में बनी यह सीरीज किसी राजनीतिक प्रोपेगेंडा के बजाय एक ठोस क्राइम प्रोसीजरल की तरह आगे बढ़ती है।

किस दिशा जाती है कहानी?

यह सीरीज खोजी पत्रकार अनिरुद्ध मित्रा की चर्चित किताब 'नाइन्टी डेज' पर आधारित है। कहानी की शुरुआत 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में हुए उस आत्मघाती धमाके से होती है, जिसने पूरे देश को सुन्न कर दिया था। इसके तुरंत बाद तत्कालीन सरकार एक विशेष जांच दल का गठन करती है, जिसका नेतृत्व अनुभवी अधिकारी डीआर कार्तिकेयन ने किया, इस किरदार को अमित सियाल ने निभाया। सीरीज का मुख्य केंद्र 90 दिनों की गहन जांच पर आधारित है। इसमें जांच टीम बिखरे हुए सुरागों को जोड़कर लिट्टे के उस नेटवर्क तक पहुंचती है जिसने इस पूरी साजिश को अंजाम दिया था। 

सीरीज का टर्निंग पॉइंट

कहानी में दिखाया गया है कि कैसे एक छोटे से कैमरे में कैद हुई तस्वीरें जांच का टर्निंग पॉइंट बनती हैं। एक तरफ जहां मास्टरमाइंड शिवरासन और उसके साथी देश के अलग-अलग कोनों में छिपते फिर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कार्तिकेयन की टीम बिना किसी आधुनिक तकनीक के केवल अपने दिमाग और जमीनी खुफिया जानकारी के दम पर घेराबंदी सख्त करती जाती है। यह सीरीज केवल हत्या की जांच नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक युद्ध है, जहां एक तरफ मिशन है और दूसरी तरफ विचारधारा से प्रेरित कट्टरता।

निर्देशन, अभिनय और तकनीकी पक्ष

नागेश कुकुनूर ने इस संवेदनशील विषय को बहुत ही बारीकी के साथ पर्दे पर उतारा है। उन्होंने ड्रामे के बजाय वास्तविकता पर अधिक जोर दिया है। अमित सियाल ने डीआर कार्तिकेयन के किरदार में जान फूंक दी है, उनकी शांत लेकिन दृढ़ कार्यशैली दर्शकों को प्रभावित करती है। उनके साथ साहिल वैद, भगवती पेरुमल और विदुत गर्ग ने अपनी भूमिकाओं के साथ पूरा न्याय किया है। सीरीज में असली आर्काइवल फुटेज का इस्तेमाल इसे और भी ठोस बनाता है। म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर 90 के दशक के उस तनावपूर्ण माहौल को जीवंत करने में सफल रहे हैं।

IMDb रेटिंग और OTT प्लेटफॉर्म

यदि आप वास्तविक घटनाओं पर आधारित थ्रिलर और खोजी कहानियों के शौकीन हैं, तो यह सीरीज आपकी वॉच-लिस्ट में जरूर होनी चाहिए। इसे आप सोनी लिव पर देख सकते हैं। इसे IMDb पर 7.9 रेटिंग मिली है।

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